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चित्रकूट उप कृषि निदेशक ने स्वयं हल चलाकर दिया खेती का संदेश, मानिकपुर में किसानों को किया जागरूक

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मानिकपुर (चित्रकूट)।आधुनिकता के दौर में खेती के पारंपरिक तौर-तरीकों को जीवंत रखने और किसानों को अपनी कृषि विरासत से जोड़ने की पहल सामने आई है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के चित्रकूट के कृषि निदेशक जीत गुप्ता ने मानिकपुर क्षेत्र में खेत में स्वयं बैलों से हल चलाकर किसानों को परंपरागत खेती के प्रति जागरूक किया।

खेत में उप कृषि निदेशक जीत लाल गुप्ता को स्वयं हल चलाते देख ग्रामीण परिवेश की पारंपरिक कृषि संस्कृति की झलक दिखाई दी। यह पहल खेती-किसानी के प्रति जुड़ाव, किसानों के श्रम के सम्मान और पारंपरिक कृषि ज्ञान के महत्व को रेखांकित करती है।

बुंदेलखंड के चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है। ऐसे में पारंपरिक कृषि पद्धतियों के अनुभवों को समझना तथा उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयोग में लाना महत्वपूर्ण है। बैलों से जुताई जैसी पुरानी विधियां आज भी कुछ क्षेत्रों में प्रचलित हैं और ग्रामीण कृषि परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं।

कृषि क्षेत्र में बदलते समय के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है, वहीं स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों के महत्व को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कृषि निदेशक की इस पहल को इसी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम जरूरी

किसानों की समृद्धि के लिए खेती में उपयोगी पारंपरिक अनुभवों और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। जागरूकता की ऐसी पहल किसानों को कृषि की जड़ों से जोड़ने के साथ खेती के प्रति नई पीढ़ी का जुड़ाव बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है।

उप निदेशक कृषि का संदेश

उप निदेशक कृषि ने कहा कि किसानों को परंपरागत कृषि पद्धतियों के महत्व को समझने के साथ ही समय के अनुसार वैज्ञानिक तकनीकों को भी अपनाना चाहिए। बुंदेलखंड की कृषि परिस्थितियों को देखते हुए कम लागत वाली खेती, मृदा की उर्वरता का संरक्षण तथा उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। कृषि विभाग का उद्देश्य किसानों को जागरूक कर कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में प्रोत्साहित करना है।

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C P Dwivedi
लेखक परिचय : चन्द्र प्रकाश द्विवेदी, चित्रकूट निवासी एक सक्रिय पत्रकार, लेखक, शिक्षाविद् और सामाजिक विचारक हैं, जो पिछले दो दशकों से हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र ‘सरस भावना’ के संपादक के रूप में जनपक्षीय पत्रकारिता कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों से की और अपने लेखन तथा संपादन कौशल से बुंदेलखंड की पत्रकारिता को नई दिशा दी। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर (M.A.), कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री (M.Sc. CS), सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर (MSW), पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिग्री, और क़ानूनी ज्ञान में स्नातक (L.L.B.) की शिक्षा प्राप्त की है। वे एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं — एक संवेदनशील पत्रकार, प्रतिबद्ध समाजसेवी, करियर काउंसलर, राजनीतिक विश्लेषक, अधिवक्ता और व्यंग्यकार। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि परिवर्तन और ग्रामीण विकास जैसे जनहित से जुड़े विषयों पर निरंतर काम कर रहे हैं। वर्तमान में वे बुंदेली प्रेस क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार हैं। लेखन नाम बड़का पंडित‘’ के नाम से वे राजनीतिक पाखंड, जातिवाद, दिखावटी विकास, मीडिया के पतन और सामाजिक विडंबनाओं पर तीखे, मगर प्रभावशाली व्यंग्य लिखते हैं, जो समाज को सोचने और बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी न सिर्फ व्यंग्य का माध्यम है, बल्कि बुंदेलखंड की पीड़ा, चेतना और संघर्ष की आवाज़ भी हैऔर शिक्षा, स्वास्थ्य व ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।

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