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चित्रकूट में दोहरा कानून? गेट बचा, घर उजड़े, प्रशासन झुका बाबाओं के आगे, टूटा जनता पर कहर

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चित्रकूट में चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान को लेकर अब प्रशासन पर भेदभावपूर्ण रवैये के आरोप लगने लगे हैं। रामधाम वार्ड क्रमांक 9 और जानकीकुंड वार्ड 10–11 में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत जहां आम नागरिकों के घर, दुकानें और निर्माण ध्वस्त किए जा रहे हैं, वहीं रामायणी कुटी जैसे प्रभावशाली धार्मिक स्थलों को छुआ तक नहीं गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने गरीबों और आम जनता के साथ कठोरता दिखाई है, लेकिन बाबाओं और बड़े आश्रमों के सामने नतमस्तक हो गया। आरोपों के मुताबिक कई जगहों पर बिना मुआवज़ा, पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के सीधा जेसीबी भेजी गई, जिससे लोगों की सालों की मेहनत और जीवनभर की कमाई का आशियाना एक झटके में मलबे में तब्दील हो गया।

 

रामधाम क्षेत्र के निवासियों ने बताया कि कहीं 3 से 4 फीट ज़्यादा ज़मीन कब्जे में बताकर तोड़फोड़ की गई, तो कहीं प्रभावशाली लोगों के कब्जे को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर दिया गया। सबसे बड़ा विरोध रामायणी कुटी को लेकर हुआ, जहाँ मुख्य सड़क से जुड़ा गेट और बाहरी निर्माण सड़क चौड़ीकरण की सीमा में आने के बावजूद untouched छोड़ दिया गया। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई समान रूप से लागू नहीं हो रही है, बल्कि प्रभाव और पहुँच के आधार पर तय हो रही है कि जेसीबी कहाँ चलेगी और कहाँ रुकेगी।

इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ जब जनता ने आवाज़ उठाई, स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सवाल खड़े हुए, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया और रामायणी कुटी पर भी हल्की कार्रवाई की गई। दोबारा बुलाए गए जेसीबी दस्ते ने गेट से लगे कुछ निर्माण हटाए, लेकिन जिस तेजी और कठोरता से आम लोगों पर कार्रवाई की गई थी, वह यहाँ नज़र नहीं आई। इस पर भी जनता का कहना है कि प्रशासन अब दिखावे के लिए कार्रवाई कर रहा है ताकि विरोध को शांत किया जा सके।

प्रशासन की ओर से कहा गया है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से हो रही है और किसी के साथ पक्षपात नहीं किया जा रहा है। एसडीएम चित्रकूट का कहना है कि सभी वार्डों में एक समान नीति के तहत कार्य हो रहा है, और जहां भी अतिक्रमण पाया गया, उसे हटाया जाएगा। हालांकि, ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही बयान कर रही है, क्योंकि कई स्थानों पर आज भी कुछ चुने हुए निर्माण जस के तस खड़े हैं, जबकि आम नागरिकों के घरों का नामोनिशान मिट चुका है।

सवाल यह है कि क्या विकास की कीमत सिर्फ गरीब और आम आदमी चुकाएगा? क्या कानून और प्रशासनिक कार्रवाई प्रभावशाली लोगों के दरवाज़े पर जाकर मौन हो जाएगी? और क्या धार्मिक संस्थानों के नाम पर अतिक्रमण को ‘आस्था’ मानकर छोड़ा जाएगा, जबकि नागरिकों की आशाएं और छतें बिना आस्था के भी गिरा दी जाएंगी? चित्रकूट की सड़कों पर उठती जेसीबी की धूल के बीच यह सवाल अब और अधिक तीखे हो गए हैं, जिनका जवाब देना प्रशासन के लिए ज़रूरी होता जा रहा है।

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C P Dwivedi
लेखक परिचय : चन्द्र प्रकाश द्विवेदी, चित्रकूट निवासी एक सक्रिय पत्रकार, लेखक, शिक्षाविद् और सामाजिक विचारक हैं, जो पिछले दो दशकों से हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र ‘सरस भावना’ के संपादक के रूप में जनपक्षीय पत्रकारिता कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों से की और अपने लेखन तथा संपादन कौशल से बुंदेलखंड की पत्रकारिता को नई दिशा दी। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर (M.A.), कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री (M.Sc. CS), सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर (MSW), पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिग्री, और क़ानूनी ज्ञान में स्नातक (L.L.B.) की शिक्षा प्राप्त की है। वे एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं — एक संवेदनशील पत्रकार, प्रतिबद्ध समाजसेवी, करियर काउंसलर, राजनीतिक विश्लेषक, अधिवक्ता और व्यंग्यकार। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि परिवर्तन और ग्रामीण विकास जैसे जनहित से जुड़े विषयों पर निरंतर काम कर रहे हैं। वर्तमान में वे बुंदेली प्रेस क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार हैं। लेखन नाम बड़का पंडित‘’ के नाम से वे राजनीतिक पाखंड, जातिवाद, दिखावटी विकास, मीडिया के पतन और सामाजिक विडंबनाओं पर तीखे, मगर प्रभावशाली व्यंग्य लिखते हैं, जो समाज को सोचने और बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी न सिर्फ व्यंग्य का माध्यम है, बल्कि बुंदेलखंड की पीड़ा, चेतना और संघर्ष की आवाज़ भी हैऔर शिक्षा, स्वास्थ्य व ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।

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