कथा के साथ सेवा का संगम, क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण हुवा प्रफुल्लित
चित्रकूट – तीन दिवसीय श्री हरिकथामृत में सेवा का अद्भुत समर्पण, कर्वी में भव्य समापन — कर्वी स्थित सत्संग भवन, प्रयागराज रोड, कर्वी में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय श्री हरिकथामृत का समापन 31 मार्च को सायं 4 बजे से 7:30 बजे तक भक्ति, ज्ञान और सेवा के अद्भुत संगम के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भिक सत्र में भरत मिश्रा (पूर्व कुलपति, ग्रामोदय विश्वविद्यालय), योगेश कुमार दुबे (विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट), भैरों प्रसाद मिश्रा (पूर्व सांसद), चन्द्र प्रकाश खरे, पूर्व जिला अध्यक्ष भाजपा, आनंद त्रिपाठी, भाजपा नेता एवं हरिओम करवरिया, भाजपा नेता, संतोष तिवारी, संजय मिश्रा, देवमुनी तिवारी,जेपी यादव, सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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29 से 31 मार्च तक चले इस दिव्य आयोजन में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा श्रवण किया और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। कार्यक्रम में प्रतिदिन लगभग 300–500 श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति एवं उत्साह का वातावरण बना रहा। श्री आशुतोष महाराज जी की प्रेरणा से आयोजित इस कथा में जीवन मूल्यों, संस्कारों और समाज सेवा का प्रेरणादायक संदेश दिया गया। समापन सत्र में अलोक चुबे (कुलपति, महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय) एवं दिनेश मिश्रा (पूर्व विधायक) सहित अनेक अतिथियों की उपस्थिति रही।
इस अवसर पर संस्थान की साध्वी कथावाचको ने अपने संदेश में कहा कि “कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का मार्ग है। जब तक भक्ति के साथ सेवा नहीं जुड़ती, तब तक साधना पूर्ण नहीं होती। समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सेवा और संस्कार के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।”
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इस पूरे तीन दिवसीय कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि स्थानीय टीम/संस्था द्वारा सेवा, सहयोग एवं व्यवस्थापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। श्रद्धालुओं के लिए बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, भोजन एवं अन्य सुविधाओं का सुचारु संचालन करते हुए तीनों दिन निरंतर सेवा कार्य किया गया, जो सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना। अंत में आयोजकों ने सभी सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प लिया।
“जहाँ कथा, वहाँ सेवा — यही सच्ची साधना है।”





