मंगलवार, फ़रवरी 3, 2026
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करवी से कारपोरेट सोच तक – एक महिला CA की उड़ान, सी ए आस्था अग्रवाल से व्यवसाय, ईमानदारी और संतुलन पर बातचीत

सिर्फ टैक्स भरने वाला नहीं, बल्कि व्यवसाय का डाक्टर होता है यह मानना है करवी की चार्टर्ड एकाउन्टेट आस्था अगवाल का। शादी से पहले हाफ CA और शादी के बाद फुल CA बनने का उनका सफर यह साबित करता है कि सही प्रेरणा और अनुशासन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। संख्याएँ जब संस्कार बन जाएँ, तो पेशा केवल रोज़गार नहीं रह जाता, वह सामाजिक ज़िम्मेदारी बन जाता है। लखनऊ से प्रारंभिक शिक्षा, सुलतानपुर में संपूर्ण अध्ययन और आज करवी में एक पहचान बना चुकीं आस्था अगवाल मानती हैं कि जैसे शरीर की देखभाल ज़रूरी है, वैसे ही वित्त की चिंता भी उतनी ही आवश्यक है।
जन्मदिन के अवसर पर सरस भावना सम्वादक चन्द्र प्रकाश द्विवेदी‘ बडका पंडित ’ से हुई यह बातचीत उनके पारिवारिक संस्कार, हाफ CA से फुल CA तक के सफर, व्यवसायिक ईमानदारी और जीवन-संतुलन की कहानी कहती है।

जन्मदिन विशेष बातचीत में उन्होंने वित्तीय ईमानदारी, टैक्स प्लानिंग और युवाओं की भूमिका पर खुलकर अपनी बात रखी।

चार्टर्ड एकाउन्टेट आस्था अगवाल से विशेष बातचीत

सम्पादक -सबसे पहले जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। आप अपने पेशे को किस रूप में देखती हैं?
आस्था अगवाल – धन्यवाद। मैं चार्टर्ड एकाउन्टेट को केवल पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक ज़िम्मेदारी मानती हूँ। जैसे हम अपने शरीर की चिंता करते हैं, समय पर इलाज, सही खान-पान, उसी तरह वित्त (Finance) की चिंता भी ज़रूरी है। अगर शरीर बिगड़ता है तो जीवन रुकता है, और अगर वित्त बिगड़ता है तो पूरा व्यवसाय संकट में आ जाता है।

सम्पादक – क्या अकाउंटिंग आपके लिए पारिवारिक विरासत रही है?
आस्था अगवाल – बिल्कुल। शादी से पहले ही मेरा पूरा पारिवारिक बैकग्राउंड अकाउंटिंग से जुड़ा रहा है। मेरे पिता एकाउन्टेन्ट रहे हैं, मेरे दादा जी भी इसी क्षेत्र से जुड़े थे और मेरे भाई, जी.एस-टी- एडवाइजर एडवोकेट हैं। ऐसे माहौल में पली-बढ़ी होने के कारण अकाउंट और वित्त मेरे लिए कभी डर का विषय नहीं रहे, बल्कि समझ का विषय रहे।

सम्पादक – आपकी शिक्षा और CA बनने की यात्रा कैसी रही?
आस्था अगवाल – मेरी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ से हुई, और उसके बाद सुलतानपुर में मैंने अपनी पूरी शिक्षा पूरी की। शादी से पहले मैं हाफ CA ( इन्टर लेवल क्वालीफाइड) थी। शादी के बाद ज़िम्मेदारियाँ बढ़ीं, लेकिन वहीं से मुझे आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा भी मिली। लगन, परिवार के सहयोग और आत्मविश्वास के बल पर मैंने फुल CA का मुकाम हासिल किया।

सम्पादक – आपके जीवनसाथी भी चार्टर्ड एकाउन्टेट हैं। यह साथ कैसा रहा?
आस्था अगवाल – मेरे पति सीैरभ अगवाल स्वयं चार्टर्ड एकाउन्टेट हैं। यह प्रोफेशनल समानता हमारे लिए ताकत बनी। चुनौतियाँ भी आईं, लेकिन हमने यह सीखा कि प्रोफेसनल {डिसएग्रीमेन्ट} को पर्सनल नहीं बनने देना चाहिए। घर और ऑफिस दोनों जगह संतुलन बनाए रखना सबसे ज़रूरी है।

सम्पादक – एक महिला CA के रूप में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
आस्था अगवाल – सबसे बड़ी चुनौती है, घर, परिवार और प्रोफेशन, तीनों को समान महत्व देना। अगर किसी एक को नज़रअंदाज़ किया जाए, तो बाकी दो भी प्रभावित होते हैं। हर भूमिका को समय पर निभाना ही असली सफलता है।

सम्पादक – आज के व्यवसायियों को आप CA की भूमिका कैसे समझाना चाहेंगी?
आस्था अगवाल – सी.ए. सिर्फ “टैक्स भरने वाला” नहीं होता। सी.ए. एक मैनेजमेंट एडवाइज़र, फाइनेंशियल कंसल्टेंट और मार्गदर्शक होता है। हमारा काम क्लाइंट के लिए टैक्स चोरी करना नहीं बल्कि कानूनी टैक्स प्लानिंग करना है, क्लाइंट का काम सिर्फ फीस के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी वित्तीय सेहत के लिए होना चाहिए।

सम्पादक – नए उद्यमी सबसे बड़ी गलती कहाँ करते हैं?
आस्था अगवाल – अधिकतर नई गलतियाँ जानबूझकर नहीं, बल्कि वित्तीय ज्ञान के अभाव में होती हैं। नए उद्यमी टैक्स को बोझ समझते हैं, जबकि टैक्स व्यवस्था का हिस्सा है। अगर शुरुआत से सही प्लानिंग हो, तो व्यापार मजबूत बनता है।

सम्पादक – क्या सी.ए.को किसी और पेशे से तुलना कर सकती हैं?
आस्था अगवाल – मैं सी.ए. को डॉक्टर की तरह मानती हूँ। जैसे डॉक्टर पूरे शरीर की जाँच करता है, वैसे ही सी.ए. को अकाउंट, टैक्स मैनेजमेंट, भविष्य के जोखिम सब कुछ देखना चाहिए। सी.ए.को बहुविषयक विशेषज्ञ होना चाहिए।

सम्पादक – जो युवा सी.ए.नहीं बन पाते, उनके लिए आपका संदेश?
आस्था अगवाल – सी.ए.ही एकमात्र रास्ता नहीं है। आज कई विकल्प हैं, जीएसटी, एकाउन्टेन्ट प्रोफेसनल, आदि वित्तीय समझ और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ें।

सम्पादक – प्रोफेशन के अलावा आपकी रुचियाँ क्या हैं?
आस्था अगवाल – मुझे डांसिंग का बहुत शौक है। इसके अलावा घूमना-फिरना मेरी पसंदीदा हॉबी है। अब तक मैं तीन देशों की यात्रा कर चुकी हूँ, और मेरा सपना है कि पूरी दुनिया घूमूँ। मेरा मानना है कि घूमना इंसान को नया दृष्टिकोण देता है, जो प्रोफेशन में भी मदद करता है।

सम्पादक – छोटे शहरों के युवाओं के लिए आपका संदेश?
आस्था अगवाल – छोटा शहर कभी भी सीमित सोच का कारण नहीं होना चाहिए। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और सीखने की इच्छा हो तो कर्वी चित्रकूट जेसे क्षेत्र से भी देश-दुनिया तक पहुँचा जा सकता है।

सम्पादक – जन्मदिन पर समाज के लिए आपका संदेश?
आस्था अगवाल – अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ वित्तीय स्वास्थ्य को भी गंभीरता से लें। समय पर सलाह लें, सही योजना बनाएँ और ईमानदारी से आगे बढ़ें, यही स्थायी सफलता की कुंजी है।

यह साक्षात्कार एक महिला चार्टर्ड एकाउन्टेट की सफलता-कथा ही नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि वित्तीय अनुशासन सामाजिक सशक्तिकरण की नींव है।

C P Dwivedi
C P Dwivedihttps://sarasbhavna.com
लेखक परिचय : चन्द्र प्रकाश द्विवेदी, चित्रकूट निवासी एक सक्रिय पत्रकार, लेखक, शिक्षाविद् और सामाजिक विचारक हैं, जो पिछले दो दशकों से हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र ‘सरस भावना’ के संपादक के रूप में जनपक्षीय पत्रकारिता कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों से की और अपने लेखन तथा संपादन कौशल से बुंदेलखंड की पत्रकारिता को नई दिशा दी। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर (M.A.), कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री (M.Sc. CS), सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर (MSW), पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिग्री, और क़ानूनी ज्ञान में स्नातक (L.L.B.) की शिक्षा प्राप्त की है। वे एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं — एक संवेदनशील पत्रकार, प्रतिबद्ध समाजसेवी, करियर काउंसलर, राजनीतिक विश्लेषक, अधिवक्ता और व्यंग्यकार। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि परिवर्तन और ग्रामीण विकास जैसे जनहित से जुड़े विषयों पर निरंतर काम कर रहे हैं। वर्तमान में वे बुंदेली प्रेस क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार हैं। लेखन नाम बड़का पंडित‘’ के नाम से वे राजनीतिक पाखंड, जातिवाद, दिखावटी विकास, मीडिया के पतन और सामाजिक विडंबनाओं पर तीखे, मगर प्रभावशाली व्यंग्य लिखते हैं, जो समाज को सोचने और बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी न सिर्फ व्यंग्य का माध्यम है, बल्कि बुंदेलखंड की पीड़ा, चेतना और संघर्ष की आवाज़ भी हैऔर शिक्षा, स्वास्थ्य व ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।
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