चित्रकूट जनपद के मानिकपुर तहसील अंतर्गत सेमरदहा गांव से तीन किलोमीटर दूर स्थित ओहन बांध में इन दिनों हालात गंभीर होते जा रहे हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते बांध में पानी का स्तर बढ़कर लगभग 57 फीट तक पहुंच चुका है, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता पहले 61 फीट थी। इस बढ़ते जलस्तर को लेकर स्थानीय लोगों में भय और दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गेट समय से नहीं खोले गए तो बांध के फूटने का खतरा मंडरा सकता है, जिससे पचास से अधिक गांवों पर बाढ़ का संकट आ सकता है।
जानकारी के अनुसार, यह बांध काफी पुराना है और वर्षों से सिंचाई विभाग की उपेक्षा का शिकार रहा है। जर्जर हालत में पहुंच चुके इस बांध के 16 आपातकालीन गेटों में से केवल 4–5 गेट ही काम कर रहे हैं, बाकी गेट जंग लगने और रखरखाव न होने के कारण जाम हो चुके हैं। यही वजह है कि जरूरत पड़ने पर पानी की निकासी बाधित हो रही है और पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले सप्ताह जब पानी 53 फीट के करीब पहुंच गया था, तब मऊ-मानिकपुर विधायक के निर्देश पर कुछ गेट खोले गए थे, जिससे पानी का स्तर घटकर 50 फीट रह गया था। लेकिन बीते कुछ दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश ने एक बार फिर स्थिति को विकराल बना दिया है और अब पानी 57 फीट तक भर चुका है, जिससे बांध के आसपास की सड़कों पर पानी आना शुरू हो गया है।
इस बीच मानिकपुर के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) मोहम्मद जसीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग के एक्सईएन से फोन पर वार्ता की और स्थिति की जानकारी ली। एसडीएम ने बताया कि विभाग पूरी तरह सतर्क है और बांध पर लगातार नजर बनाए हुए है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल बांध में पानी अभी भी क्षमता से थोड़ा कम है और तत्काल खतरे की कोई स्थिति नहीं है। हालांकि अधिकारी सतत निगरानी कर रहे हैं और यदि जलस्तर बढ़ा तो त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि हर साल यही स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन बांध की मरम्मत या गेटों की स्थायी सुधार की दिशा में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया। अब जब हालात नियंत्रण से बाहर होते नजर आ रहे हैं, तब जाकर विभाग सक्रिय हुआ है। सवाल उठता है कि क्या हमेशा हालात बिगड़ने के बाद ही प्रशासन जागेगा?
ओहन बांध की मौजूदा स्थिति यह बताती है कि यदि समय रहते उचित कदम न उठाए गए, तो यह एक भीषण त्रासदी में बदल सकता है, जिसकी चपेट में खेत, मकान, मवेशी और सैकड़ों लोगों की जान आ सकती है। प्रशासन और विभाग को चाहिए कि बिना किसी और देरी के गेटों की मरम्मत, वैकल्पिक जल निकासी और संभावित गांवों को अलर्ट करने की दिशा में कदम उठाए, ताकि समय रहते कोई भी बड़ा हादसा रोका जा सके।