ग्रामोदय विश्वविद्यालय के एमबीए (ग्रामीण प्रबंधन) पाठ्यक्रम की पढ़ाई से मिलते है शिक्षा और रोजगार के अनेक अवसर*चित्रकूट, 12 जुलाई 2025। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास एवं व्यवसाय प्रबंधन संकाय अंतर्गत संचालित एमबीए (ग्रामीण प्रबंधन) पाठ्यक्रम की पढ़ाई करने से शिक्षा और रोजगार के अनेक अवसर प्राप्त होते हैं। इस आशय की जानकारी देते हुए ग्रामीण प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र प्रसाद पाण्डेय के पी जी पाठ्यक्रम के अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि भारत की 68 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में रहती है I जब गावों में इतनी ज्यादा संख्या में लोग रहते है तो यहां करियर की कई बेहतरीन संभावनाएं भी उपलब्ध है। यदि विकास दर की बात करें तो साल 2000 के बाद से ग्रामीण भारत की विकास दर 6.2 प्रतिशत रही जबकि शहरी इलाकों की विकास दर सिर्फ 4.2 प्रतिशत ही रही। अतः विकास दर के मामले में देखा जाए तो स्पष्ट है कि ग्रामीण भारत का तेजी से विकास हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की भारी मांग है। अगर कोई ग्रामीण विकास में योगदान के साथ ही अपना करियर बनाना चाहता है तो उसके लिए एम्.बी.ए. (ग्रामीण प्रबंधन) या मास्टर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (रूरल मैनेजमेंट) पाठ्यक्रम का अध्ययन सहायक रहेगा ।
गांवों से शहरों की तरफ लगातार हो रहे पलायन की वजह से ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में बदलाव आ रहे है। ऐसे लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं उपलब्ध कराने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में वैज्ञानिक तरीके से योगदान देना एक रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल का काम होता है। रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स को न सिर्फ बेहतरीन पैकेज दिया जा रहा है बल्कि रोजगार की अपार संभावनाओं के चलते युवा इस करियर में अपनी किस्मत आजमा रहे है। अगर आप भी ग्रामीण विकास में अपना योगदान देने के साथ ही करियर बनाना चाहते है तो आइये जानते है इस फील्ड से जुड़े केरियर के बारे में।
रूरल मैनेजमेंट में केरियर की संभावनाएं- रूरल मैनेजमेंट कोर्सेज की सबसे खास बात यह है कि इन्हें इस तरह से बनाया गया है कि छात्रों को पढ़ाई गई चीजों को ट्रेनिंग, फील्ड वर्क, इंटर्नशिप, सर्वे, केस स्टडी और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है I कोर्स पूरा करने के बाद युवाओं के पास केरियर बनाने के कई ऑप्शन होते हैं। रूरल मैनेजमेंट की फील्ड में कई अवसर उपलब्ध है। ऐसी कई सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियां है जो मैनेजर, कंसल्टेंट, एनालिस्ट या रिसर्चर के रूप में रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल को जॉब देती है। कंपनियों की सी.एस.आर., माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के अलावा रूरल कॉपरेटिव सेक्टर, एग्री बिजनेस, फूड एंड एग्रीकल्चर मार्केंटिग आदि में भी रूरल मैनेजर्स के लिए कई अवसर मौजूद है। एम्.बी.ए. (ग्रामीण प्रबंधन) पाठ्यक्रम के छात्र पी.एच.डी. करने हेतु हेतु विश्वविद्यालयों तथा अन्य संस्थानों में पंजीकृत होते हैं तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यापन कार्य करते हैं I ग्रामीण विकास के लिए काम करने वाले एनजीओ रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल को अच्छे पैकेज के साथ नौकरी पर रखते है। इन एनजीओ में रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल को ट्रेनर, रिसर्चर, कंसल्टेंट, प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर आदि के रूप में काम मिलता है। इस पाठ्यक्रम के बाद छात्र सरकारी और प्राइवेट दोनों ही नौकरियां पा सकते हैं. जिसमे विश्लेषक, नीति निर्माता, मैनेजर, सलाहकार , शोधकर्ता, आदि के रूप में काम करने का मौका मिलता है. इस क्षेत्र में ख़ास तौर पर विकास की योजनाओं, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा, मार्केटिंग, मानव संसाधन, प्रोजेक्ट इ्प्लिलमेंटेशन, सामान्य प्रबंधन, जैसे काम शामिल होते हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले बैंक भी इसके लिए विशेषज्ञों को बतौर प्रबंधक के तौर पर नियुक्त करते हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय एनजीओ के साथ मिलकर भी गांव में विकास के लिए काम करने का मौका मिलता है.
इसके अलावा कई अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ और संयुक्त राष्ट्र की विकास एजेंसियां है जो रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल को जॉब देती है। इसके अलावा छात्र फ्रीलांसिंग या पार्ट टाइम के रूप में समाज सेवा करके भी अच्छा पैसा कमा सकते है। अगर कोई चाहे तो खुद का एनजीओ शुरू करके भी अच्छा करियर बना सकता है या फिर सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में कोई कार्य कर सकता है I
रूरल मैनेजमेंट वर्क प्रोफाइल- एक रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल को विकास कार्यकर्ता के रूप में कार्य के अवसर प्राप्त होते हैं आगे चल कर उसे रूरल मैनेजर के रूप में काम करना होता है। ये लोग ग्रामीण विकास परियोजनाओं की तैयारी, उनका क्रियन्वयन और विकास को बेहतर बनाने के लिए काम करते है। इन लोगों के ऊपर ग्रामीण इलाकों में विकास के कार्य को गति देने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। ये लोग ग्रामीण क्षेत्रों में फर्म या कंपनी के मैनेजमेंट के साथ प्लानिंग, बजट, मार्केट एनालिसिस जैसे काम करते है। देश में माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के बढ़ते योगदान से इस क्षेत्र में ग्रामीण प्रबंधन प्रोफेशनल्स की बहुत मांग है। अतः अब ग्रामीण प्रबंधन के छात्रों को वित्तीय सेवा क्षेत्र में अपार अवसर प्राप्त हो रहे हैं और वे माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं में विक्रय अधिकारी, ब्रांच मेनेजर, आडिटर, इत्यादि रोल में कार्य कर रहे हैं I कंपनी अधिनियम 2013 और सी.एस.आर नियम 2014 के क्रियान्वयन के पश्चात प्रत्येक बड़ी योग्य कंपनी को कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सी.एस.आर.) का कार्य करना वैधानिक आवश्यकता हो गयी है I इस हेतु कम्पनियां स्वयं या अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर सी.एस.आर. के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाएं क्रियान्वित कर रही हैं इस क्षेत्र में रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल सी,एस.आर. अधिकारी, मेनेजर इत्यादि भूमिका निभा रहे हैं I गैर सरकारी संगठनों (एन जी ओ) में ये प्रोफेशनल वाटरशेड, विकास, जनजातीय विकास, आजीविका संवर्धन इत्यादि में विभिन्न भूमिका में कार्य कर रहे हैं I राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एन.आर.एल.एम्.), राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, नाबार्ड, वाटरशेड मिशन, शोध संस्थानों इत्यादि सरकारी संस्थाओं तथा विभागों में भी इन प्रोफेशनल्स के लिए अवसर प्राप्त होते हैं I
*पाठ्यक्रम की संरचना*
दो वर्ष तथा 4 सत्र में विभाजित एम् बी ए (ग्रामीण प्रबंधन) पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक प्रश्न पत्र जैसे ग्रामीण प्रबंधन के सिद्धांत, ग्रामीण विकास, वित्तीय प्रबंधन, ग्रामीण प्रबंधन, परियोजना प्रबंधन, माइक्रो फाइनेंस प्रबंधन, आजीविका संवर्धन, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, एन जी ओ प्रबंधन, उद्यमिता, शोध प्राविधि इत्यदि का अध्ययन किया जाता है तथा छात्रों को अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में फील्ड वर्क करना होता है I महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में प्रत्येक छात्र को प्रति सप्ताह दो दिन ग्रामीण क्षेत्र में फील्ड वर्क करना होता है इस अवधि में छात्र ग्रामीण संस्कृति, गाँव में रहने वाले लोगों की दिनचर्या, ग्रामीण समस्याएं, उपलब्ध अवसर इत्यादि का अध्ययन करते हैं तथा ग्राम पंचायत, स्वयं सहायता समूह, कृषक उत्पादक समूह, गाँव में कार्य करने वाले एन जी ओ, सामाजिक उत्तरदायित्व कार्य करने वाली कंपनियों, शिक्षण संस्थाओं, माइक्रो क्रोफिनांस संस्थाओं इत्यादि के साथ मिलकर कार्य करते हैं तथा प्रथम वर्ष के बाद 45 दिन की समर ट्रेनिंग तथा द्वितीय वर्ष के बाद 45 दिन की इंटर्नशिप इन संस्थाओं में करते हैं I मेरिट के आधार पर कुछ छात्रों को पेड इंटर्नशिप का अवसर भी प्राप्त होता है I छात्रों द्वारा पूर्व निर्धारित विषय पर लघु शोध प्रबंध किया जाता है I
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय शिक्षा मंत्रालय के नियामक अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (ए आई सी टी ई)से मान्यता प्राप्त डिग्री देते हैं I
*आवेदन कैसे करें*
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट में प्रवेश हेतु इच्छुक छात्र एम् पी आनलाइन के माध्यम से पंजीकरण करा कर प्रवेश ले सकते हैं I
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