May 12, 2021

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अयोध्या में आज जन्मेंगे रघुराई: रामनगरी में भक्तों के आने पर रोक

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500 सालों के बाद पहली बार बुधवार को राम नवमी पर्व पर राम जन्मभूमि में विराजमान भगवान श्री रामलला और उनके तीन भाइयों भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न को सोने का मुकुट धारण कराया गया। यह मुकुट विशेष रुप से राम नवमी के लिए एक भक्त द्वारा गोपनीय दान दिया गया है। कोरोना महामारी के चलते इस बार अयोध्या में भक्तों के आने पर रोक है। इसलिए मंदिरों में बिना भक्तों के संत-महंत कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत राम नवमी पर्व मना रहे हैं। दोपहर 12 बज प्रभु राम का जन्म होगा। लेकिन इससे पहले ही हर तरफ से राम-नाम की गूंज है।

हर साल 20 लाख श्रद्धालु आते थे
जहां पिछले सालों में रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में भव्य राम जन्मोत्सव का आयोजन होता था, 20 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ प्रभु राम के जन्मोत्सव में शामिल होती थी, वहीं इस साल कोरोना महामारी के चलते सन्नाटा है। मंदिरों के कपाट बंद है। बाहरी व स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़ अयोध्या में नहीं जुटने दी जा रही है। राम की नगरी में एंट्री के रास्तों में पुलिस की चेकिंग चल रही है। सरयू तट पर सन्नाटा पसरा है।

अब दिन में 12 बजे कनक भवन सहित हजारों की संख्या में मंदिरों में भए प्रकट कृपाला दीन दयाल के स्वर गूंजेगे। प्रभु राम का जन्मोत्सव मंदिरों के भीतर तक ही सीमित रहेगा। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के मुताबिक कोरोना महामारी से मुक्ति के लिए प्रभु राम से प्रार्थना की जाएगी। राम जन्मोत्सव के अवसर पर आज राम जन्मभूमि में स्थित राम लला मंदिर में चारों भाइयों राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न को सोने के मुकुट पहनाए गए। परंपरागत तरीके से रामलला मंदिर में पूजा अर्चना व उत्सव मंदिर के पुजारी सत्येंद्र दास की टीम ने आयोजित किया।

हैदराबाद के शरद बाबू द्वारा लकड़ी से बनाया गया राम मंदिर मॉडल मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। साथ-साथ प्रभात मूर्ति कला केन्द्र ग्वालियर से बनकर आई भगवान राम की 7 फीट ऊंची प्रतिमा भी परिसर में स्थापित हुई।
हैदराबाद के शरद बाबू द्वारा लकड़ी से बनाया गया राम मंदिर मॉडल मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। साथ-साथ प्रभात मूर्ति कला केन्द्र ग्वालियर से बनकर आई भगवान राम की 7 फीट ऊंची प्रतिमा भी परिसर में स्थापित हुई।

तीन तरह की पंजीरी का लगेगा भोग

बता दें कि 1992 से लेकर अब तक रामलला को चांदी के मुकुट में सोने की पॉलिश लगाकर धारण कराया जाता था। लेकिन अब उन्हें शुद्ध सोने का मुकुट धारण कराया गया है। रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास ने बताया कि परंपरा के तहत की राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पूजा, भोग और आरती के कार्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। जन्म के बाद पंचामृत से स्नान कराया जाएगा। वस्त्रों को धारण कराने के बाद फल, फलाही पकौड़े का भोग लगेगा। तीन तरह की पंजीरी का भोग लगेगा।

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